करेंट अफेयर्स 14.01.2022

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करेंट अफेयर्स 14.01.2022 pdf

1. इसरो के नए अध्यक्ष एस. सोमनाथ

एक प्रख्यात रॉकेट वैज्ञानिक एस सोमनाथ को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष और अंतरिक्ष सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है।

डॉ. सोमनाथ का प्रमुख योगदान

उन्होंने पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) और जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल Mk-III (GSLV Mk-III) के विकास में प्रमुख भूमिका निभाई है।

- वह वर्ष 2003 में GSLV Mk-III परियोजना में शामिल हुए और वर्ष 2010 से 2014 तक परियोजना निदेशक के रूप में कार्य किया।

- वह प्रमोचन वाहनों के सिस्टम इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं।

- बाद में उन्होंने जीएसएलवी के लिये स्वदेशी क्रायोजेनिक चरणों के विकास में योगदान दिया।

2. ‘प्रौद्योगिकी हेतु राष्ट्रीय शैक्षिक गठबंधन’ पहल

मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) ने उच्च शिक्षा क्षेत्र में बेहतर परिणाम प्राप्त करने हेतु प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के लिये ‘प्रौद्योगिकी हेतु राष्ट्रीय शैक्षिक गठबंधन 3.0‘ (NEAT 3.0) की घोषणा की है।

NEAT योजना का मॉडल: यह सरकार और भारत की शिक्षा प्रौद्योगिकी (एडटेक) कंपनियों के बीच एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर आधारित है।

- उद्देश्य: NEAT का उद्देश्य समाज के आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमज़ोर वर्गों की सुविधा के लिये शिक्षा अध्यापन में सर्वोत्तम तकनीकी समाधानों को एक मंच पर लाना है।

लक्षित क्षेत्र: इसके तहत अत्यधिक रोज़गार योग्य कौशल वाले विशिष्ट क्षेत्रों में सीखने या ई-सामग्री के लिये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करने वाले प्रौद्योगिकी समाधानों की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

कार्य पद्धति: इसके तहत सरकार एडटेक कंपनियों द्वारा पेश किये जाने वाले पाठ्यक्रमों की एक शृंखला के लिये मुफ्त कूपन वितरित करने की योजना बना रही है।

कार्यान्वयन एजेंसी: अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE)

3. भारत वन स्थिति रिपोर्ट-2021

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने भारत वन स्थिति रिपोर्ट-2021 जारी की है।

अक्तूबर, 2021 में भारत के वन शासन में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन लाने के लिये MoEFCC द्वारा वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 में एक संशोधन प्रस्तावित किया गया था।

यह भारत के वन और वृक्ष आवरण का आकलन है। इस रिपोर्ट को द्विवार्षिक रूप से ‘भारतीय वन सर्वेक्षण’ द्वारा प्रकाशित किया जाता है।

- वर्ष 1987 में पहला सर्वेक्षण प्रकाशित हुआ था वर्ष 2021 में भारत वन स्थिति रिपोर्ट (India State of Forest Report-ISFR) का यह 17वांँ प्रकाशन है।

- ISFR का उपयोग वन प्रबंधन के साथ-साथ वानिकी और कृषि वानिकी क्षेत्रों में नीतियों के नियोजन एवं निर्माण में किया जाता है।

- वनों की तीन श्रेणियों का सर्वेक्षण किया गया है जिनमें शामिल हैं- अत्यधिक सघन वन (70% से अधिक चंदवा घनत्व), मध्यम सघन वन (40-70%) और खुले वन (10-40%)।

- स्क्रबस (चंदवा घनत्व 10% से कम) का भी सर्वेक्षण किया गया लेकिन उन्हें वनों के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया।

4. नाटो-रूस परिषद वार्ता

‘उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन’ (नाटो) और रूस के मध्य ब्रुसेल्स में नाटो-रूस परिषद (NRC) में यूक्रेन की मौजूदा स्थिति और यूरोप की सुरक्षा हेतु इसके निहितार्थों पर चर्चा की गई।

नाटो और रूस के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता बिना किसी स्पष्ट परिणाम के संपन्न हुई।

नाटो-रूस परिषद’ की स्थापना 28 मई 2002 को रोम (रोम घोषणा) में नाटो-रूस शिखर सम्मेलन में की गई थी।

- इसने स्थायी संयुक्त परिषद (PJC) का स्थान लिया, जो कि आपसी संबंधों पर वर्ष 1997 के नाटो-रूस स्थापना अधिनियम द्वारा परामर्श और सहयोग हेतु एक मंच है।

- ‘नाटो-रूस परिषद’ परामर्श, सर्वसम्मति-निर्माण, सहयोग, संयुक्त निर्णय और संयुक्त कार्रवाई हेतु एक तंत्र है, जिसमें व्यक्तिगत नाटो सदस्य राज्य और रूस समान हित के सुरक्षा मुद्दों के व्यापक स्पेक्ट्रम पर समान भागीदार के रूप में काम करते हैं।

नाटो ने यूरोप में एक नए सुरक्षा समझौते की रूस की मांग को खारिज कर दिया, रूस को यूक्रेन के पास तैनात सैनिकों को वापस लेने और खुले संघर्ष के खतरे को कम करने हेतु बातचीत में शामिल होने की चुनौती दी।

- अमेरिका और यूरोपीय संघ के लिये यूक्रेन रूस के साथ एक महत्त्वपूर्ण बफर के रूप में कार्य करता है। यूक्रेन ओचाकिव में और दूसरा बर्दियांस्क में एक नौसैनिक अड्डा भी बना रहा है, जिससे रूस खुश नहीं है।

- रूस ने नाटो में और सदस्यों को शामिल करने तथा अपने पूर्वी सहयोगियों से पश्चिमी ताकतों को वापस लेने की मांग की। इसने यह भी चेतावनी दी कि इससे "यूरोपीय सुरक्षा के लिये सबसे अप्रत्याशित और सबसे भयानक परिणाम" हो सकते हैं।

- नाटो सहयोगियों और रूस के मध्य अत्यधिक मतभेद हैं जिन्हें पाटना आसान नहीं होगा।

5. सौर अपशिष्ट

नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (NSEFI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2030 तक भारत में 34,600 टन से अधिक संचयी सौर अपशिष्ट उत्पन्न कर सकता है।

भारत में सौर अपशिष्ट प्रबंधन नीति नहीं है, लेकिन महत्त्वाकांक्षी सौर ऊर्जा स्थापना लक्ष्य है।

- एनएसईएफआई भारत के सभी सौर ऊर्जा हितधारकों का एक ‘अंब्रेला’ संगठन है। जो नीति समर्थन के क्षेत्र में काम करता है और भारत में सौर ऊर्जा विकास से जुड़े सभी मुद्दों को संबोधित करने के लिये एक राष्ट्रीय मंच है।

सौर अपशिष्ट एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक कचरा है जो छोड़े गए सौर पैनलों द्वारा उत्पन्न होता है। उन्हें देश में कबाड़ के रूप में बेचा जाता है।

- यह अगले दशक तक कम से कम चार-पाँच गुना बढ़ सकता है। सौर कचरे से निपटने के लिये भारत को अपना ध्यान व्यापक नियम बनाने पर केंद्रित करना चाहिये।

6. असम-मेघालय सीमा विवाद

21 जनवरी, 2022 में को मेघालय राज्य के 50वें स्थापना दिवस समारोह से पूर्व, गृह मंत्री द्वारा असम-मेघालय सीमा के छह क्षेत्रों में विवाद को समाप्त करने के लिये अंतिम समझौते पर मुहर लगाए जाने की उम्मीद है।

असम और मेघालय दोनों राज्य 885 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं। फिलहाल उनकी सीमाओं पर 12 बिंदुओं पर विवाद है।

- असम-मेघालय सीमा विवाद ऊपरी ताराबारी, गज़ांग आरक्षित वन, हाहिम, लंगपीह, बोरदुआर, बोकलापारा, नोंगवाह, मातमुर, खानापारा-पिलंगकाटा, देशदेमोराह ब्लॉक I और ब्लॉक II, खंडुली और रेटचेरा के क्षेत्रों पर हैं।

- मेघालय को असम पुनर्गठन अधिनियम, 1971 के तहत असम से अलग किया गया, यह कानून जिसे मेघालय द्वारा चुनौती दी गई विवाद का कारण बना।

असम और मेघालय के बीच विवाद का एक प्रमुख बिंदु असम के कामरूप ज़िले की सीमा से लगे पश्चिम गारो हिल्स में लंगपीह ज़िला है।

- लंगपीह ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान कामरूप ज़िले का हिस्सा था, लेकिन आज़ादी के बाद यह गारो हिल्स और मेघालय का हिस्सा बन गया।

- असम इसे मिकिर पहाड़ियों (असम में स्थित) का हिस्सा मानता है।

- मेघालय ने मिकिर हिल्स के ब्लॉक I और II पर सवाल उठाया है, जो अब कार्बी आंगलोंग क्षेत्र असम का हिस्सा है। मेघालय का कहना है कि ये तत्कालीन यूनाइटेड खासी और जयंतिया हिल्स ज़िलों के हिस्से थे।

असम और मेघालय दोनों ने सीमा विवाद निपटान समितियों का गठन किया है।

सीमा विवादों को चरणबद्ध तरीके से हल करने के लिये दो क्षेत्रीय समितियों का गठन करने का निर्णय लिया गया है और सीमा विवाद को हल करते समय पाँच पहलुओं पर विचार किया जाएगा।

- वे ऐतिहासिक तथ्य, जातीयता, प्रशासनिक सुविधा, संबंधित लोगों की मनोदशा और भूमि से निकटता हैं।

- पहले चरण में छह स्थलों पर विचार किया जा रहा है। ये ताराबारी, गिजांग, हाहिम, बकलापारा, खानापारा-पिलिंगकाटा और रातचेरा हैं।

- ये विवादित क्षेत्र असम की तरफ कछार, कामरूप मेट्रो और कामरूप ग्रामीण तथा मेघालय की तरफ पश्चिम खासी हिल्स, री भोई ज़िले व पूर्वी जयंतिया हिल्स का हिस्सा हैं।

7. भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता

भारत और ब्रिटेन ने औपचारिक ‘मुक्त व्यापर समझौता’ (FTA) वार्ता शुरू की है, जिसे दोनों देशों ने वर्ष 2022 के अंत तक समाप्त करने की परिकल्पना की है।

तब तक दोनों देश एक अंतरिम मुक्त व्यापार क्षेत्र पर विचार कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप अधिकांश वस्तुओं पर शुल्क कम हो जाएगा।

दोनों देश कुछ चुनिंदा सेवाओं के लिये नियमों में ढील देने के अलावा वस्तुओं के एक छोटे से समूह पर टैरिफ कम करने के लिये एक प्रारंभिक फसल योजना या एक सीमित व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं।

- इसके अलावा वे ‘संवेदनशील मुद्दों’ से बचने और उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने पर सहमत हुए जहाँ अधिक पूरकता मौजूद है।

- व्यापार वार्ता में कृषि और डेयरी क्षेत्रों को भारत के लिये संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।

- साथ ही वर्ष 2030 तक भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य भी रखा गया है।

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