करेंट अफेयर्स 13.01.2022

  करेंट अफेयर्स 13.01.2022

करेंट अफेयर्स 13.01.2022 pdf

1. वैश्विक जोखिम रिपोर्ट 2022

- विश्व आर्थिक मंच द्वारा ‘वैश्विक जोखिम रिपोर्ट-2022’ जारी की गई। यह जोखिम विशेषज्ञों और व्यापार, सरकार एवं नागरिक समाज में विश्व प्रतिनिधियों के बीच वैश्विक जोखिम धारणाओं को ट्रैक करती है।

यह पाँच श्रेणियों में जोखिमों को ट्रैक करती है: आर्थिक, पर्यावरण, भू-राजनीतिक, सामाजिक और तकनीकी।

  • कोविड-19 का प्रभाव: महामारी की शुरुआत के बाद से सामाजिक और पर्यावरणीय जोखिम सबसे अधिक बढ़ गए हैं।
    • ‘सामाजिक एकता में ह्रास’, ‘आजीविका संकट’ और ‘मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट’ अगले दो वर्षों में दुनिया के लिये सबसे अधिक खतरे के रूप में देखे जाने वाले तीन प्रमुख जोखिमों हैं।
    • इसके अलावा इसने "ऋण संकट", "साइबर सुरक्षा विफलताओं", "डिजिटल असमानता" और "विज्ञान के खिलाफ प्रतिक्रिया" में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।
  • वैश्विक आर्थिक आउटलुक: यह प्रमुख रूप से अल्पकालिक आर्थिक दृष्टिकोण को अस्थिर, खंडित, या तेज़ी से विनाशकारी मानता है। 
    • महामारी से बनी सबसे गंभीर चुनौती आर्थिक ठहराव है। 
  • पर्यावरणीय जोखिम: "अत्यधिक मौसम" और "जलवायु कार्रवाई विफलता" लघु, मध्यम और दीर्घकालिक दृष्टिकोणों में शीर्ष जोखिम के रूप में दिखाई देते हैं।
    • सरकारों, व्यवसायों और समाजों को नेट ज़ीरो अर्थव्यवस्थाओं में संक्रमण के लिये बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
  • भू-राजनीतिक और तकनीकी जोखिम: लंबी अवधि में, भू-राजनीतिक और तकनीकी जोखिम भी चिंता का विषय हैं, जिनमें "भू-आर्थिक टकराव", "भू-राजनीतिक संसाधन प्रतियोगिता" और "साइबर सुरक्षा विफलता" शामिल हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय जोखिम: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष दोहन, सीमा पार साइबर हमले और गलत सूचना व प्रवास एवं शरणार्थियों की अंतर्राष्ट्रीय चिंताओं को शीर्ष रूप में दर्जा दिया गया था।
    • आर्थिक कठिनाई के रूप में बढ़ती असुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव और राजनीतिक उत्पीड़न लाखों लोगों को बेहतर भविष्य की तलाश में अपना घर छोड़ने के लिये मजबूर करेंगे।
    • अंतरिक्ष पर्यटन के अलावा आने वाले दशकों में 70,000 उपग्रहों के प्रक्षेपण की संभावना, विनियमन की कमी के मध्य अंतरिक्ष में टकराव और बढ़ते अंतरिक्ष मलबे के जोखिम को बढ़ाएगी।
  • 2. भारत और अमेरिका के बीच ‘होमलैंड सिक्योरिटी डायलॉग’
भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच होमलैंड सिक्योरिटी डायलॉग का आयोजन किया गया था।

अक्तूबर 2021 में रक्षा मंत्रालय ने विदेशी सैन्य बिक्री (FMS) के तहत भारतीय नौसेना के लिये एमके 54 टॉरपीडो और एक्सपेंडेबल (चफ एंड फ्लेयर्स) की खरीद के लिये अमेरिकी सरकार के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किये।

- जुलाई 2021 में अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत का दौरा किया।

भारत-अमेरिका मातृभूमि सुरक्षा वार्ता 2010 में भारत-अमेरिका की आतंकवाद विरोधी पहल पर हस्ताक्षर करने की अगली कड़ी के रूप में शुरू की गई थी।

- पहली होमलैंड सुरक्षा वार्ता मई 2011 में आयोजित की गई थी।

- नवीनतम आभासी बैठक मार्च 2021 के बाद हुई, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन प्रशासन ने होमलैंड सिक्योरिटी डायलॉग को  फिर से शरु करने की घोषणा की थी जिसे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने बंद कर दिया था।

- इंडो-यूएस होमलैंड सिक्योरिटी डायलॉग के तहत छह उप-समूह बनाए गए हैं, जो निम्नलिखित क्षेत्रों को कवर करते हैं:

-- अवैध वित्त, वित्तीय धोखाधड़ी और जालसाजी।
-- साइबर जानकारी।
-- मेगासिटी पुलिसिंग और संघीय, राज्य और स्थानीय भागीदारों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान।
-- वैश्विक आपूर्ति शृंखला, परिवहन, बंदरगाह, सीमा और समुद्री सुरक्षा।
-- क्षमता निर्माण।
-- प्रौद्योगिकी उन्नयन।

3. कृष्णा जल विवाद

सर्वोच्च न्यायालय के दो जजों ने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच कृष्णा नदी जल  के बँटवारे के विवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है।

उन्होंने इसका कारण बताया कि वे पक्षपात का निशाना नहीं बनना चाहते क्योंकि विवाद उनके गृह राज्यों से संबंधित है।

न्यायाधीशों का बहिष्कार

  • यह पीठासीन न्यायालय के अधिकारी या प्रशासनिक अधिकारी के हितों के टकराव के कारण कानूनी कार्यवाही जैसी आधिकारिक कार्रवाई में भाग लेने से अनुपस्थित रहने से संबंधित है।
  • जब हितों का टकराव होता है तो एक न्यायाधीश मामले की सुनवाई से पीछे हट सकता है ताकि यह धारणा पैदा न हो कि उसने मामले का निर्णय करते समय पक्षपात किया है।
  • पुनर्मूल्यांकन को नियंत्रित करने वाले कोई औपचारिक नियम नहीं हैं, हालाँकि सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्णयों में इस मुद्दे पर बात की गई है
    • रंजीत ठाकुर बनाम भारत संघ (1987) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि यह दूसरे पक्ष के मन में पक्षपात की संभावना की आशंका के प्रति तर्कों को बल प्रदान करती है।
    • न्यायालय को अपने सामने मोजूद पक्ष के तर्क को देखना चाहिये और तय करना चाहिये कि वह पक्षपाती है या नहीं।
  • परिचय:
    • वर्ष 2021 में आंध्र प्रदेश ने आरोप लगाया कि तेलंगाना सरकार द्वारा उसे "असंवैधानिक और अवैध" तरीके से पीने एवं सिंचाई के लिये पानी के अपने वैध हिस्से से वंचित कर दिया गया।
    • श्रीशैलम जलाशय का पानी, जो कि दोनों राज्यों के बीच नदी के जल का मुख्य भंडारण है, संघर्ष का एक प्रमुख बिंदु बन गया है।
      • आंध्र प्रदेश ने तेलंगाना द्वारा बिजली उत्पादन हेतु श्रीशैलम जलाशय के पानी के उपयोग का विरोध किया।
      • श्रीशैलम जलाशय आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी पर बनाया गया है। यह नल्लामाला पहाड़ियों में स्थित है।
    • इसने आगे तर्क दिया कि तेलंगाना, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत गठित शीर्ष परिषद में लिये गए निर्णयों, इस अधिनियम के तहत गठित कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (केआरएमबी) के निर्देशों और केंद्र के निर्देशों का पालन करने से इनकार कर रहा है।
  • 3. उत्तर कोरिया पर अमेरिकी प्रतिबंध
अमेरिका ने उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रमों की एक शृंखला के बाद उत्तर कोरिया के हथियार कार्यक्रमों पर अपना पहला प्रतिबंध लगाया है।

इन प्रतिबंधों का उद्देश्य उत्तर कोरिया के कार्यक्रमों की प्रगति को रोकना और हथियार प्रौद्योगिकियों के प्रसार के उसके प्रयासों को बाधित करना है।

- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के कई प्रस्तावों और कूटनीति एवं परमाणु निरस्त्रीकरण के लिये अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के आह्वान के बावजूद उत्तर कोरिया अपने मिसाइल कार्यक्रम को जारी रखे हुए है।

अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच वर्तमान संघर्ष का इतिहास सोवियत संघ व अमेरिका के बीच शीत युद्ध में खोजा जा सकता है।

- द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की हार के बाद ‘याल्टा सम्मेलन’ (1945) में मित्र देशों की सेना ‘कोरिया पर फोर-पावर ट्रस्टीशिप’ स्थापित करने हेतु सहमत हुई।

- ‘साम्यवाद’ (किसी देश के आर्थिक संसाधनों पर राज्य का स्वामित्व) के प्रसार के डर और सोवियत संघ व अमेरिका के बीच आपसी अविश्वास के कारण ट्रस्टीशिप योजना विफल हो गई।

- इससे पहले कि कोई ठोस योजना तैयार की जा सके, सोवियत संघ ने कोरिया पर आक्रमण कर दिया।

- इससे एक ऐसी स्थिति पैदा हो गई जहांँ कोरिया का उत्तर क्षेत्र यूएसएसआर के अधीन तथा दक्षिण क्षेत्र ओर उसके बाकी सहयोगी, मुख्य रूप से अमेरिका के अधीन थे।

- 38वें समानांतर रेखा द्वारा कोरियाई प्रायद्वीप को दो क्षेत्रों में विभाजित किया गया था।

- वर्ष 1948 में संयुक्त राष्ट्र ने पूरे कोरिया में स्वतंत्र चुनाव का प्रस्ताव रखा।

- यूएसएसआर ने इस योजना को खारिज कर दिया और उत्तरी भाग को डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (उत्तर कोरिया) के रूप में घोषित किया गया।

- चुनाव अमेरिकी संरक्षण में हुआ जिसके परिणामस्वरूप कोरिया गणराज्य (दक्षिण कोरिया) की स्थापना हुई।

- उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया दोनों ने क्षेत्रीय एवं वैचारिक रूप से अपनी पहुंँच बढ़ाने की कोशिश की, जिसने कोरियाई संघर्ष को जन्म दिया।

4. लोक अदालत

लोक अदालत वैकल्पिक विवाद समाधान के सबसे प्रभावशाली उपकरण के रूप में उभरी है।

वर्ष 2021 में कुल 1,27,87,329 मामलों का निपटारा किया गया। ई-लोक अदालतों जैसी तकनीकी प्रगति के कारण लोक अदालतें पार्टियों के दरवाज़े तक पहुँच गई हैं।

'लोक अदालत' शब्द का अर्थ 'पीपुल्स कोर्ट' है और यह गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित है।

- सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, यह प्राचीन भारत में प्रचलित न्यायनिर्णयन प्रणाली का एक पुराना रूप है और वर्तमान में भी इसकी वैधता बरकरार है।

- यह वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) प्रणाली के घटकों में से एक है जो आम लोगों को अनौपचारिक, सस्ता और शीघ्र न्याय प्रदान करता है।

- पहला लोक अदालत शिविर वर्ष 1982 में गुजरात में एक स्वैच्छिक और सुलह एजेंसी के रूप में बिना किसी वैधानिक समर्थन के निर्णयों हेतु आयोजित किया गया था।

- समय के साथ इसकी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए इसे कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत वैधानिक दर्ज़ा दिया गया था। यह अधिनियम लोक अदालतों के संगठन और कामकाज से संबंधित प्रावधान करता है।

5. भारत के रूफटॉप सोलर प्रोग्राम में चुनौतियाँ

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत रूफटॉप सोलर योजना के तहत अक्तूबर 2021 के अंत तक सिर्फ 6GW रूफटॉप सोलर (RTS) बिजली स्थापित कर सका।

हालाँकि उपयोगिता-पैमाने पर सौर परियोजनाओं के लिये अग्रणी खिलाड़ियों के साथ जबरदस्त प्रगति देखी गई है और टैरिफ में गिरावट एवं मेगा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने वाली सरकारी एजेंसियाँ ​​आरटीएस उपेक्षित बनी हुई हैं।

रूफटॉप सोलर एक फोटोवोल्टिक प्रणाली है जिसमें बिजली पैदा करने वाले सौर पैनल आवासीय या व्यावसायिक भवन या संरचना की छत पर लगे होते हैं।

- रूफटॉप माउंटेड सिस्टम मेगावाट रेंज में क्षमता वाले ग्राउंड-माउंटेड फोटोवोल्टिक पावर स्टेशनों की तुलना में छोटे होते हैं।

- आवासीय भवनों पर रूफटॉप पीवी सिस्टम में आमतौर पर लगभग 5 से 20 किलोवाट (kW) की क्षमता होती है, जबकि वाणिज्यिक भवनों पर 100 किलोवाट या उससे अधिक पहुँच जाती हैं।

योजना का मुख्य उद्देश्य घरों की छत पर सोलर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा उत्पन्न करना है।

- साथ ही नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने ग्रिड से जुड़ी रूफटॉप सोलर योजना के चरण 2 के कार्यान्वयन की घोषणा की है।

- इस योजना का उद्देश्य वर्ष 2022 तक रूफटॉप सौर परियोजनाओं से 40 गीगावाट की अंतिम क्षमता हासिल करना है।

- 40GW का लक्ष्य 175GW के नवीकरणीय ऊर्जा (RE) क्षमता प्राप्त करने के भारत के महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य का हिस्सा है, जिसमें वर्ष 2022 तक 100GW सौर ऊर्जा शामिल है।

- सितंबर 2021 में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन ने देश में नवीकरणीय ऊर्जा प्रतिष्ठानों की गति को धीमा कर दिया और ऐसे प्रतिष्ठानों की गति भारत के वर्ष 2022 के लक्ष्य से पीछे है।


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